Ganpati Aarti in Marathi | श्री गणपतीची आरती

Here we present you marathi ganpati aarti to celebrate this Ganesh Festival 2016. Happy Ganesh Chaturthi 2016 to everyone out there!

Lord Shree Ganesh HD Images, Wallpapers 2016 - Free Download
Download – Lord Ganesh hd Image

आरत्या –
……………………………………………
श्री गणपतीची आरती

सुखकर्ता दु:खहर्ता वार्ता विघ्नाची | नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जायची | सर्वांग सुंदर उटी शेंदुराची | कंठी झळके माळ मुक्ताफळाची | जयदेव जयदेव जय मंगलमूर्ती | दर्शनमात्रे मन:कामना पुरती जय देव जय देव || धृ || रत्नखचित फार तुज गौरीकुमरा | चान्दांची उटी कुंकुमकेशरा | हिरेजडीत मुगुट शोभती बरा | रुणझुणती नुपुरे चरणी घागरिया || जय || २ || लंबोदर पितांबर फणीवरबंधना | सरळ तोंड वक्रतुंड त्रिनयना | दास रामाचा वाट पाहे सदना | संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवरवंदना | जयदेव जयदेव जय मंगलमुर्ती | दर्शनमात्रे मन:कामना पुरती || ३ ||
……………………………………………

श्री गणपतीची आरती

शेंदूर लाल चढायो अच्छा गज मुखको | दोंदिल लाल विराजे सुत गौरीहरको | हाथ लिये गुडलड्डू साई सुरवरको | महिमा काहे न जाय लागत हुं पदको || १ || जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता | धन्य तुम्हारा दर्शन मेरा मन रमता || धृ || अष्टौ सिद्धी दासी संकटको बैरी | विघ्नविनाशक मंगल मुरत अधिकारी | कोटीसुरजप्रकाश ऐसी छबी तेरी | गंडस्थलमदमस्तक झुले शशिबिहारी || जय || २ || भावभगतसे कोई शरणागत आवे | संतत संपत सबही भरपूर पावे | ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे | गोसावीवंदन निशिदिन गुण गावे | जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता || धन्य || ३ ||

श्री शंकराची आरती

लवथवती विक्राळा ब्रम्हांडी माळा | वीषे कंठी कला त्रिनेत्री ज्वाळा | लावण्यसुंदर मस्तकी बाळा | तेथुनिया जल निर्मळ वाहे झुळझुळा || १ || जय देव जय देव जय श्रीशंकरा | आरती ओवाळू तुज कर्पूरगौरा || धृ || कर्पुरगौरा भोळा नयनी विशाळा | अर्धांगी पार्वती सुमनांच्या माळा | विभूतीचे उधळण शितिकंठ निळा | ऐसा शंकर शोभे उमावेल्हाळा | जय देव || २ || देवी दैत्यी सागर मंथन पै केले | त्यामाजी अवचित हळहळ जें उठिले | तें त्वां असुरपणे प्राशन केलें | नीळकंठ नाम प्रसिद्ध झाले | जय || ३ || व्याघ्रांबर फणिवरधर सुंदर मदनारी | पंचानन मनमोहन मुनिजनसुखकारी | शतकोटीचे बीज वाचे उच्चारी | रघुकुळटिळक रामदासाअंतरी || जय देव || ४ ||

श्री देवीची आरती

दुर्गे दुर्घट भारी तुजवीण संसारी | अनाथनाथे अंबे करुणा विस्तारी | वारी वारी जन्ममरणाते वारी | हरी पडलो आता संकट निवारी || १ || जय देवी जय देवी महिषसूरमथिनी | सुरवरईश्वरवरदे तारक संजीवनी जय देवी जय देवी || धृ || त्रिभुवन भुवनी पाहता तुजऐसी नाही | चारी श्रमले परंतु न बोलवे काही | साही विवाद करिता पडिले प्रवाही | तें तू भक्तालागी पावसी लवलाही || जय || २ || प्रसन्नवदनेTV प्रसन्न होसी निजदासा | क्लेशापासुनि सोडावि तोडी भवपाषा अंबे तुजवाचून कोण पुरविल आशा | नरहरी तल्लिन झाला पदपंकजलेशा | जय देवी जय देवी जय महिषासुरमथिनी | सुरवरईश्वरवरदे तारक || ३ ||

श्री दत्ताची आरती

त्रिगुणात्मक त्रिमूर्ती दत्त हा जाणा | त्रिगुणी अवतार त्रिलोक्यराणा | नेति नेति शब्द नये अनुमाना | सुरवरमुनिजन योगी समाधी न ये ध्याना || १ || जय देव जय देव जय श्रीगुरुदत्ता | आरती ओवाळीता हरली भवचिंता जय देव जय देव || धृ || सबाह्य अभ्यंतरी तू एक दत्त | अभाग्यासी कैची कळेल हे मात | पराही परतली तेथे कैचा हा हेत | जन्ममरणाचा पुरलासे अंत || जय || २ || दत्त येउनिया उभा ठाकला भावे सांष्टागेसी प्रणिपात केला | प्रसन्न होऊनी आशीर्वाद दिधला | जन्ममरणाचा फेरा चुकविला || जय || ३ || दत्त दत्त ऐसे लागले ध्यान | हारपले मन झाले उन्मन | मी तू झाली बोळवण | एका जनार्दनी श्रीदत्तध्यान || जय देव || ४ ||

श्री विठोबाची आरती

युगे अठ्ठावीस विटेवरी उभा | वामांगी रखुमाई दिसे दिव्य शोभा | पुंडलिकाचे भेटी परब्रम्ह आले गा | चरणी वाहे भीमा उद्धरी जगा || १ || जय देव जय देव जय पांडुरंगा || रखुमाईवल्लभा राहीच्या वल्लभा पावे जिवलगा जय देव जय देव || धृ || तुळसीमाळा गळा कर ठेवुनी कटी | कांसे पितांबर कस्तुरी लल्लाटी | देव सुरवर नित्य येती भेटी | गरुड हनुमंत पुढे उभे राहती || जय || २ || धन्य वेणुनाद अनुक्षेत्रपाळा | सुवर्णाची कमळे वनमाळा गळा | राई रखुमाई राणीया सकळा | ओवाळिती राजा विठोबा सावळा || जय || ३ || ओवाळू आरत्या कुर्वंड्या येती | चंद्रभागेमाजी सोडुनिया देती | दिंड्या पताका वैष्णव नाचती | पंढरीचा महिमा वर्णावा किती || जय || ४ || आषाढी कार्तिकी भक्तजन येती | चंद्रभागेमध्ये स्नाने जें करिती | दर्शनहेळामात्रे तया होय मुक्ती | केशवासी नामदेव भावे ओवाळिती || जय देव जय देव जय || ५ ||

मारुतीची आरती

सत्राणे उड्डाणे हुंकार वदनी | करि डळमळ भूमंडळ सिंधूजळ गगनी || कडाडिले ब्रम्हांड धाक त्रिभुवनी | सुरवर नर निशाचर त्यां झाल्या पळणी || १ || जय देव जय देव जय श्रीहनुमंता | तुमचेनी प्रसादे न भी कृतांता || धृ || दुमदुमले पाताळ उठिला प्रतिशब्द | थरथरला धरणीधर मानिला खेद | कडकडिले पर्वत उद्दगण उच्छेद | रामी रामदासा शक्तीचा शोध || जय || २ ||

श्री ज्ञानदेवाची आरती

आरती ज्ञानराजा | महाकैवल्यतेजा | सेविती साधुसंत || मनु वेधला माझा || आरती || धृ || लोपलें ज्ञान जगी | हित नेणती कोणी | अवतार पांडुरंग | नाम ठेविले ज्ञानी || १ || कनकाचे ताट करी | उभ्या गोपिका नारी | नारद तुंबर हो || साम गायन
करी || २ || प्रकट गुह्य बोले | विश्र्व ब्रम्हाची केलें | रामजनार्दनी | पायी मस्तक ठेविले | आरती ज्ञानराजा | महाकैवल्यतेजा || सेविती || ३ ||
……………………………………………

आरती जय जय जगदीश हरे

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे | भक्त जनो कें संकट क्षण में दूर करे || ओSम || जो घ्यावे फल पावे दु:ख विनशे मनका | सुख संपती घर आवे कष्ट मिटे तनका || ओSम || मात पिता तुम मेरे शरण गहू किसकी | तुम बिन और न दूजा आस करू किसकी || ओsम || तुम हो पुरण परमात्मा तुम अंतरयामी | पार ब्रम्ह परमेश्वर तुम सबके स्वामी || ओSम || तुम करुणा कें सागर तुम पालन कर्ता | मैं मुरख खल कामी कृपा करि भरता || ओSम || तुम हो एक अगोचर सबके प्राणपती | स्वामी किस विधी मिलू दयामय तुमको मैं कुमति || ॐ || दिन बंधू दुखहर्ता तुम रक्षक मेरे अपने हाथ उठाओ शरण पडा तेरे || ॐ || विषय विकार मिटाओ पापा हरे देवा | श्रद्धा भक्ति बधाओ संतन की देवा || ॐ ||

जय जय श्री शनिदेवाची आरती

जय जय श्रीशनिदेवा | पद्मकर शिरी ठेवा | आरती ओवाळिती | मनोभावे करुनी सेवा || धृ || सूर्यसुता शनीमूर्ती || तुझी अगाध कीर्ती | एक मुखे काय वर्णू | शेषा न चले स्फूर्ती || जय || नवग्रहांमाजी श्रेष्ठ | पराक्रम थोर तुझा | ज्यावरी कृपा करिसी | होय रंकाचा राजा || जय || २ || विक्रमासारीखा हो शककर्ता पुण्यराशी | गर्व धरितां शिक्षा केली | बहु छळियले त्यासी || जय || ३ || शंकराच्या वरदाने | गर्व रावणे केला | साडेसाती येतां त्यासी | समूळ नाशासी नेला || जय || ४ || प्रत्यक्ष गुरुनाथा | चमत्कार दावियेला | नेऊनि शूलापाशी | पुन्हा सन्मान केला || जय || ५ |vकिती गाऊ | धनी न पुरे गातां || कृपा करी दीनावरी | महाराजा समर्था || जय || ६ || दोन्ही कर जोडूनिया रखमां लीन सदा पायीं | प्रसाद हाची मागे | उदयकाळ सौख्य दावी | जय जय श्री शनिदेवा | पद्मकर शिरी ठेवा || ७ ||
…………………………………………….

🚩सर्व गणेश भक्तानां गणेशोत्सवाच्या हार्दिक शुभेच्छा.🚩

One thought on “Ganpati Aarti in Marathi | श्री गणपतीची आरती

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *